Barnyard millet in hindi | बार्नयार्ड मिलेट के फायदे, आंटा, खेती

barnyard in hindi

इस लेख में जानेंगे साँवा या Baryard millet in hindi, साँवा के फायदे और नुकसान (benefits of baryard millet and flour in hindi), साँवा की खेती सऔर इसे कहा से खरीदा जा सकता है “बार्नयार्ड मिलेट,” जिसे हिंदी में “साँवा के चावल” के नाम से जाना जाता है। यह अनाज भारतीय खाने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और यहां इस लेख में, हम इसे समझने का प्रयास करेंगे।

साँवा के चावल कैसे होते हैं | Barnyard Millet in hindi

साँवा के चावल यानी की मिलेट (Millets)यह छोटे अनाज के बीजों से बने होते हैं। इनके बीजों का आकार छोटा होता है और इन्हें चावल की तरह बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है। यह एक पौधा होता है जिसकी ऊँचाई लगभग २ से २.५ फुट के बीच होती है। साँवा के चावल के पौधे का रंग भूरा या हरा होता है और इसके पत्ते सुनहरे रंग के होते हैं।

साँवा के चावल की कीमत | Barnyard Millet Price

साँवा के चावल की कीमत अन्य अनाजों के मुकाबले थोड़ी महंगी होती है। किउंकि इसकी खेती करने के लिए खास तरह की विधि का उपयोग किया जाता है। और इसकी खेती करने में काफी कठिनाईयों क का सामना करना पड़ता है। यह विशेष रूप से उन इलाकों में उगाया जाता है जहां पानी की कमी होती है और मौसम असुविधाजनक होता है। इसके कारण इसे अन्य अनाजों के मुकाबले थोड़ी खासी कीमत पर उपलब्ध कराया जाता है। लेकिन इसके पोषक तत्व और स्वाद के लिए लोग इसे खरीदने को तैयार रहते हैं।

सांवा का आटा | Barnyard Millet Flour

साँवा के चावल से आटा बनाना एक आम प्रक्रिया है, जिसमें इसे प्राकृतिक रूप से सूखाया जाता है और फिर उसे चक्की में पीसकर आटा बनाया जाता है। यह आटा फिर विभिन्न प्रकार की रोटी बनाने में प्रयोग किया जाता है। सांवा के आटे से बनी रोटियां खाने में स्वादिष्ट होती हैं इसके अलावा इसे धोकले बनाने में भी उपयोग किया जाता है। और Barnyard Millet ka aata खाने से काफी स्वस्थ लाभ भी मिलते है। 

साँवा के चावल में मौजूद पोषण तत्व 

साँवा के चावल में विभिन्न पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो हमारे शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं। इसमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और खनिजों की भरपूर मात्रा होती है। निम्नलिखित हैं साँवा के चावल के पोषण मूल्य:

  
पोषक मूल्य (प्रति 100 ग्राम)मात्रा
कैलोरी348 कैलोरी
प्रोटीन10.3 ग्राम
कार्बोहाइड्रेट72 ग्राम
चीनी0.1 ग्राम
वसा2.6 ग्राम
फाइबर7.7 ग्राम
कैल्शियम17 मिलीग्राम
आयरन1.6 मिलीग्राम
विटामिन सी2 मिलीग्राम
  

साँवा के चावल के फायदे और नुकसान | Benefits and side effects of Barnyard Millet

साँवा के चावल के बहुत से फायदे होते हैं जो शरीर को स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं, लेकिन इसके साथ ही कुछ नुकसान भी हो सकते हैं। यहां हम इन फायदों और नुकसानों को विस्तार से देखेंगे। 

साँवा के चावल के फायदे | Benefits of Barnyard Millet in hindi

वजन नियंत्रण

साँवा के चावल में फाइबर की अच्छी मात्रा होती है, जो वजन को नियंत्रित करने में मदद करता है। इसे खाने से पेट भरा – भरा सा रहता है जिससे की भुख कम लगती है और वजन बढ़ने से नियंत्रित रहता है। 

डायबिटीज के लिए फायदेमंद

साँवा के चावल में फाइबर की मौजूदगी इंसुलिन के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करती है, जिससे डायबिटीज के मरीजों को लाभ होता है। इसके साथ ही यह कर्बोहाइड्रेट के स्तर को भी नियंत्रित करता है।

हृदय स्वास्थ्य

साँवा के चावल में मौजूद विटामिन B-6 और फोलेट हृदय स्वास्थ्य को सुधारते हैं और हृदय सम्बन्धी बीमारियों को कम करने में मदद करते हैं। और रक्तनाली को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।

ऊर्जा प्रोटीन

साँवा के चावल में प्रोटीन की अच्छी मात्रा पाई जाती है, जो शरीर के ऊर्जा स्तर को बनाए रखने में मदद करता है। प्रोटीन शरीर के उत्तेजकों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और यह ऊर्जा के स्रोत के रूप में कार्य करता है।

पाचन फाइबर

साँवा के चावल में फाइबर की अच्छी मात्रा होती है, जो पाचन प्रक्रिया को सुचारु बनाए रखने में मदद करता है। फाइबर हमारे शरीर में भोजन को पचाने के लिए महत्वपूर्ण होता है और इससे उत्तेजना का स्तर भी बना रहता है।

हड्डियों और दांतो का स्वास्थ्य

साँवा के चावल में खनिजों की भरपूर मात्रा पाई जाती है। इसमें कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम और फॉस्फोरस शामिल होते हैं, जो हड्डियों और दांतों के लिए फायदेमंद होते हैं और शरीर की सेहत को सुचारु बनाए रखने में मदद करते हैं।

सांवा की खेती | साँवा के चावल का पौधा

सांवा के चावल की खेती भारत में कई स्थानों पर की जाती है। यह खेती आर्थिक रूप से किसानों के लिए फायदेमंद होती है और साथ ही यह साँवा के चावल को उगाने में भी सामर्थ्यवान होती है।

सांवा के चावल का बीज कहां मिलेगा

सांवा के चावल का बीज बाजार से आसानी से मिल जाते है। इसे आप अपने कृषि उपकरण के विक्रेता से भी खरीद सकते हैं। ध्यान रखें कि बीज की गुणवत्ता अच्छी हो ताकि आपको अच्छा उत्पादन मिल सके।

FAQs – साँवा (बार्नयार्ड मिलेट) के लिए पूछे जाने वाले प्रश्न

1. साँवा के चावल क्या हैं और इन्हें हिंदी में क्या कहते हैं?
साँवा के चावल वास्तविकतः मिलेट (Millets) नामक छोटे अनाज के बीजों से बने होते हैं। हिंदी में इन्हें “बार्नयार्ड मिलेट” या “साँवा के चावल” के नाम से जाना जाता है।

2. साँवा के चावल कैसे खाएं और इन्हें बनाने के लिए कैसी विधि का प्रयोग करें?
साँवा के चावल को आटे के रूप में बनाकर रोटी बना सकते हैं। इसके धोकले बनाने में भी उपयोग किया जा सकता है। बनाने के लिए सांवा के आटे को पानी में मिलाकर गूंथना होता है और फिर रोटी बनाई जाती है।

3. साँवा के चावल के पोषण मूल्य क्या हैं?
साँवा के चावल में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन B-6 और फोलेट, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम और फॉस्फोरस जैसे विभिन्न पोषक तत्व पाए जाते हैं।

4. साँवा के चावल के फायदे क्या हैं?
साँवा के चावल का नियमित सेवन वजन नियंत्रण में मदद कर सकता है, डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद हो सकता है, हृदय स्वास्थ्य को सुधार सकता है, और ग्लूटेन संबंधित समस्याओं वाले लोगों के लिए सुरक्षित विकल्प हो सकता है।

5. क्या साँवा के चावल को बच्चे खा सकते हैं?
हां, साँवा के चावल को बच्चे भी खा सकते हैं। यह उनके उचित पोषण के लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है।

6. साँवा के चावल का सेवन किस समय करना चाहिए?
साँवा के चावल का सेवन किसी भी समय खाया जा सकता है, लेकिन सबसे अधिक उपयोग खाने के समय के दौरान होता है।

7. साँवा के चावल का सेवन गर्भवती महिलाएं कर सकती हैं?
हां, साँवा के चावल का सेवन गर्भवती महिलाएं कर सकती हैं, लेकिन इससे पहले अवश्य अपने चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए।

8. साँवा के चावल का सेवन किसी खास रोग के इलाज में फायदेमंद हो सकता है?
साँवा के चावल का सेवन डायबिटीज, हृदय सम्बंधी बीमारियों और ग्लूटेन संबंधित समस्याओं के इलाज में फायदेमंद हो सकता है। परन्तु इसका इस्तेमाल करने से पहले अवश्य अपने चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए।

9. साँवा के चावल के अलावा अन्य मिलेट्स कौन-कौन से हैं?
साँवा के चावल के अलावा अन्य मिलेट्स कमल बीज (कौंड़ा), फिंगर मिलेट (रागी), बाजरा, जौ, चावल का ब्राउन राइस (धानिया), जंगली कबूतरी (कोडरू), एवं फॉक्सटेल मिलेट (नवदनिया) शामिल होते हैं।

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